Saturday, 25 August 2018

Movie Review

फिल्म: जीनियस                                           निर्देशक :अनिल शर्मा                                       प्रमुख कलाकार : मिथुन चक्रवर्ती, नवाजुद्दीन सिद्दीकी,उत्कर्ष शर्मा,इसिता चौहान  ।                     गदर एक प्रेम कथा फिल्म तो सभी को याद ही होगी उसमे जो सनी पा जी में लड़के ‘जीते’ का रोले किये है ये वही है उत्कर्ष शर्मा .जो कि अब फिल्मो मे बतौर हीरो आये है, इनको लॉन्च करने का काम भी काम इसी फिल्म(गदर)का निर्देशन करने वाले अनिल शर्मा ही कर रहे हैं,ये उत्कर्ष के पिता भी है।  बात करे फिल्म की कहानी  की तो फिल्म  गुजरात के पोरबंदर बंदरगाह से शुरू होती है ,रॉ एजेंट वासुदेव शास्त्री ( उत्कर्षा शर्मा ) लहु लुहान अवस्था मे खिड्की से निकलते हुए बाहर आते हैं । ७ माह  बाद अपने कार्यालय जाते हैं ,अपने साथ हुइ घटना  मे एक बीमारी हो जाती है जिसमें उसे जरुरत से ज्यादा सुनाई देने लगता है जिसके लिए मशीन लगता है मशीन हटाने पर असहनीय दर्द होता है ,इसी हादसे में उसके पैर में गोली लगने से वह चल नहीं पाता जिस के लिए छड़ी ले के चलता है । इन सभी वाकयो के चलते कुछ रॉ अधिकारी उसे नौकरी के लिए अयोग्य घोषित कर देते है कहानी बीच बीच में नायक के अतीत अर्थात फ़्लैश बैक में ले जाती है जिस में दिखाया जाता है की वसु के माता पिता सांप्रदायिक दंगे में मार दिए जाते है,परवरिश मंदिर के पुजारी ने की है वसु अपनी पढ़ाई पूरी करने आई.आई.टी रूड़की जाता है,दुनिया की और तमाम लड़को की तरह उसे वहां नन्दनी नाम की लड़की से,तमाम तकरारो के बाद प्यार हो जाता है कहानी मोड लेते हुए बढ़ती है जहाँ एक ओर नंदनी अमेरिका चली जाती है वसु रॉ ज्वाइन कर लेता है अपनी विभाग में प्रमुख होने के चलते भारत के दुश्मन एमआरएस (नवाजुद्दीन)को पकड़ने के मिशन पे जाता है फिल्म का नाम भले ही जीनियस हो लेकिन इसमें जीनियस दिखने जैसा कुछ भी नहीं है हीरो को समय का मारा दिखाया जिसको माँ बाप का प्यार नहीं मिला प्रेमिका भी चली गई और तो और कान और पाओ भी गडबड करवा लिया कुल मिलकर पटकथा बेदम है एडिटिंग भी कुछ खास नहीं ,स्क्रीन प्ले भी सामान्य है गाने पूरी फिल्म में जरुरत से ज्यादा घुसेड़ दिए गए है,वसु और नंदनी का रोमांस भी कुछ खास नहीं है बशर्ते वसु को जीनियस सरीखा दिखानेहेतु   डांस,रोमांस,देशभक्ति,एक्शन को मिला के खिचडी तैयार कर दी है जो की एेसे सीने युग युगांतर से चले आ रहे है उत्कर्ष शर्मा ने फिर भी इन सभी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है लेकिन यही बेचारे क्या करे जब पापा ने ही बेटे के प्रदार्पण के लिए कहानी का सही ढंग से चुनाव नहीं कर सके ,इशिता को अभी एक्सप्रेशन पर थोड़े और काम करना चाहिए अब बात करे नवाजुद्दीन की तो वे तो एक्टिंग का स्कूल ही है इस फिल्म में भी अपने रोल को बखूबी निभाया है । मिथुन जैसे कलाकार की कला का सही ढंग से प्रयोग नहीं किया जा सका है कुल मिलाकर फिल्म लचकोरे खाती हुए बढ़ती है यदि आप जीनियस नाम को ध्यान में रख कर फिल्म देखने की सोच रहे है तो ऐसा न सोचे बाकि दिल की लड़ाई तो दिमाग से चलती ही रहती है । 

No comments:

Post a Comment